साज़ गमों के बजते रहें , धुन दर्द की आती रही । कसक दिल से उभरती रहीं , टीस सी कुलबुलाती रही । पिरों के शब्दों को मैनें , पंक्तियों में लिख डाला । शायद इनसें बुझ सकें , दर्द भरी यह ज्वाला । फूल समझ दुनिया को , काँटों की मशक भरतें रहे । हर राग पे हंसते रहें , साज़ गमों के बजते रहें । ना स…
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